अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित, ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग पर भी असर
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जवाबी हमलों का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है।
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तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जवाबी हमलों का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजोंऔर तेल टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
शिपिंग डेटा और अन्य स्रोतों के अनुसार, गुरुवार को होर्मुज़ स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप रही। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार तड़के तक केवल दो तेल टैंकर ही इस समुद्री मार्ग से गुजर पाए।
इस बीच, ईरान के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निकट स्थित बुशहर और रणनीतिक बंदरगाह बंदर अब्बास में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन विस्फोटों से हुए नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी सामने नहीं आया है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और क़तर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई आठ मिसाइलों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश से पहले ही मार गिराया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने नागरिक ढांचे पर हुए अमेरिकी हमलों को "युद्ध अपराध" करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। वहीं, बीबीसी वेरिफ़ाई ने ईरानी मीडिया द्वारा जारी वीडियो और तस्वीरों की पुष्टि की है, जिनमें उत्तरी ईरान के अक़-क़ला शहर में एक रेलवे पुल को हुए नुकसान को दिखाया गया है।
पेट्रोकेमिकल उद्योग पर भी पड़ा असर
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। माहशहर पेट्रोकेमिकल विशेष आर्थिक क्षेत्र संगठन ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर कहा है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए 10 जुलाई से कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की संख्या में लगभग 70 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।
दक्षिण-पश्चिमी ईरान में फ़ारस की खाड़ी के तट पर स्थित माहशहर देश के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल केंद्रों में से एक है। ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से संचालित होता है। ऐसे में यहां उत्पादन प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होती रही, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है।