दलित युवाओं को हिंसक आंदोलनों में धकेलने की साजिश, सूरज कुमार बौद्ध ने विरोधियों पर लगाए गंभीर आरोप
मिशन आंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने दलित युवाओं को संबोधित करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि दलित समुदाय के युवाओं को राजनीतिक स्वार्थ के लिए हिंसक आंदोलनों की ओर धकेलने की
Mayank Verma

Media via 8NewsNetwork
उत्तर प्रदेश: मिशन आंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने दलित युवाओं को संबोधित करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि दलित समुदाय के युवाओं को राजनीतिक स्वार्थ के लिए हिंसक आंदोलनों की ओर धकेलने की एक सुनियोजित साजिश चल रही है। उन्होंने युवाओं से भावनाओं में बहने के बजाय जमीनी हकीकत समझने और अपने भविष्य को प्राथमिकता देने की अपील की।
सूरज कुमार बौद्ध ने कहा कि दलित समाज स्वभाव से सरल और सीधा है, लेकिन कुछ स्वार्थी तत्व इसी का लाभ उठाकर उनकी भावनाओं को भड़काते हैं और हिंसक आंदोलनों में शामिल कर देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों को देखते हुए विरोधी दल सक्रिय हो चुके हैं और बहुजन समाज को सीधे पराजित न कर पाने के कारण समाज के कुछ महत्वाकांक्षी युवाओं और उग्र संगठनों को मोहरा बना रहे हैं। उनके अनुसार, ये लोग बड़ी-बड़ी बातें कर भीड़ इकट्ठा करते हैं और फिर कथित तौर पर अपने लोगों के जरिए माहौल को हिंसक बनाकर दलित युवाओं को चक्का जाम और टकराव की ओर धकेल देते हैं।
'युवाओं को मुकदमों के दलदल में फंसाने की साजिश'
सूरज कुमार बौद्ध ने अपने बयान में कहा कि विरोधियों की पहली रणनीति दलित युवाओं को गंभीर आपराधिक मुकदमों में फंसाना है। उनका दावा है कि युवाओं को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाया जाता है ताकि उनके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हो जाएं। उन्होंने कहा कि एक बार पुलिस रिकॉर्ड खराब होने पर सरकारी नौकरी, पासपोर्ट, चरित्र प्रमाण पत्र (NOC) और अन्य अवसर प्रभावित हो जाते हैं तथा वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा जेल चला जाता है तो उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है और वर्षों तक पुलिस, प्रशासन, नेताओं और वकीलों के पीछे भटकना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि सहारनपुर हिंसा, प्रयागराज हिंसा सहित अन्य घटनाओं के पीड़ित युवाओं से इस स्थिति को समझा जा सकता है। उनके अनुसार, विरोधियों की मंशा यही है कि बहुजन युवा पढ़-लिखकर अधिकारी बनने के बजाय अदालतों और मुकदमों में उलझे रहें तथा अंततः राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता बनकर रह जाएं।
'मास्टर चाबी' से ध्यान भटकाने का आरोप
बयान में सूरज कुमार बौद्ध ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम और मायावती ने हमेशा सत्ता को "मास्टर चाबी" बताया और बहुजन समाज को "हुक्मरान जमात" बनने का संदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उग्र संगठन और स्वयंभू नेता युवाओं को इसी राजनीतिक लक्ष्य से भटकाकर केवल सड़क के आंदोलनों में उलझाना चाहते हैं ताकि वे सत्ता तक न पहुंच सकें।
मायावती सरकार के कार्यकाल का किया उल्लेख
सूरज कुमार बौद्ध ने कहा कि मायावती के नेतृत्व में बनी चार सरकारों के दौरान उत्तर प्रदेश में "कानून द्वारा कानून का राज" स्थापित था। उन्होंने दावा किया कि उस समय कोई भी जातिवादी अधिकारी या बाहुबली दलित समाज के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का साहस नहीं कर सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि मायावती ने कानून व्यवस्था को लेकर अपनी ही पार्टी के तत्कालीन सांसद उमाकांत यादव के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें मुख्यमंत्री आवास से गिरफ्तार करवाया था।
रोहित वेमुला और सहारनपुर हिंसा का भी किया जिक्र
उन्होंने अपने बयान में कहा कि रोहित वेमुला मामले में बसपा प्रमुख मायावती ने संसद में मजबूती से आवाज उठाई थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सहारनपुर हिंसा के बाद दलितों की आवाज नहीं सुने जाने के विरोध में मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सिद्धांतों और आत्मसम्मान की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया।
युवाओं से संयम बरतने की अपील
अपने बयान के अंत में सूरज कुमार बौद्ध ने कहा कि जोश और जुनून जरूरी हैं, लेकिन जोश में होश खो देना आत्मघाती हो सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे कथित राजनीतिक षड्यंत्रों को पहचानें, स्वयंभू नेताओं के बहकावे में न आएं और अपनी जिंदगी तथा परिवार के भविष्य को दांव पर न लगाएं। उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं का समाधान खोखले भाषणों या सड़कों पर टकराव नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से संगठित होकर मजबूत शक्ति बनने में है।