प्रधानमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर एडिटर्स गिल्ड की आपत्ति, विदेश मंत्रालय की टिप्पणी को बताया 'कमज़ोर'
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान प्रेस
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर उठे सवाल पर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने विदेश मंत्रालय (MEA) की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है।
दरअसल, यात्रा के दौरान एक महिला पत्रकार ने सवाल किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड के पत्रकारों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की। इस पर विदेश मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने कहा था कि एक सफल राजनेता होने के नाते प्रधानमंत्री मोदी सीधे अपने बड़े पैमाने पर ग्रामीण मतदाताओं से संवाद करना पसंद करते हैं।
इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि मीडिया के सवालों का सामना करने से प्रधानमंत्री क्यों बचते हैं, इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय की यह दलील "पूरी तरह गलत और कमज़ोर" है।
गिल्ड ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री को देश के शहरी और ग्रामीण, दोनों वर्गों के लोगों के सामने राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। विशेष रूप से ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनिया ऊर्जा संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, सरकार के शीर्ष नेतृत्व का मीडिया के सवालों का जवाब देना लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बयान में यह भी कहा गया कि दुनिया के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में शीर्ष नेता नियमित रूप से मीडिया के सवालों का सामना करते हैं और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग माना जाता है। गिल्ड के अनुसार, केवल सोशल मीडिया या पहले से तैयार एकतरफा संदेश स्वतंत्र मीडिया के साथ खुले संवाद का विकल्प नहीं हो सकते।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान के अंत में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों से अपील की कि वे इस तरह की भ्रामक और हल्की-फुल्की टिप्पणियों से बचें, क्योंकि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की आज़ादी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।