शिवसेना (यूबीटी) का स्पीकर से सवाल, बाग़ी सांसदों को मान्यता देने पर जताई आपत्ति
नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों के संबंध में जानकारी मांगी।
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लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते शिवसेना (यूबीटी) के नेता। पार्टी ने बाग़ी छह सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता न देने की मांग की है।
नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों के संबंध में जानकारी मांगी। पार्टी सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने स्पीकर से मुलाकात कर बाग़ी सांसदों की स्थिति पर अपना पक्ष रखा।
अनिल देसाई ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से पूछा कि क्या उन्हें बाग़ी सांसदों की ओर से पार्टी से अलग होने या किसी नए समूह के गठन संबंधी कोई औपचारिक पत्र प्राप्त हुआ है। इस पर स्पीकर ने कहा कि वह अपने कार्यालय से जानकारी प्राप्त करने के बाद उन्हें अवगत कराएंगे।
अरविंद सावंत ने बताया कि इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) का प्रतिनिधिमंडल पहली बार 18 जून को स्पीकर से मिला था। इसके बाद पार्टी ने लिखित रूप से भी अनुरोध किया था कि किसी भी निर्णय से पहले उनका पक्ष सुना जाए। उसी क्रम में स्पीकर ने उन्हें बुधवार को चर्चा के लिए बुलाया था।
सावंत ने कहा कि पार्टी ने संविधान और दल-बदल विरोधी प्रावधानों का हवाला देते हुए मांग की है कि बाग़ी सांसदों के समूह को अलग गुट के रूप में मान्यता न दी जाए तथा लोकसभा में उनके लिए अलग बैठने की व्यवस्था भी न की जाए।
गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था। इस राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक घोषणा 22 जून को की गई थी।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश आष्टीकर शामिल हैं।
इस घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के भीतर जारी सत्ता संघर्ष और राजनीतिक पुनर्संरेखण के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।