Crime
डूंगर चर्मशोधन प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, डीएम मेरठ को नोटिस जारी
मेरठ। मेरठ के डूंगर चर्मशोधन प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट मेरठ को नोटिस जारी किया है।
8NewsNetwork
18 June 2026 at 10:15 pm

Media via 8NewsNetwork
मेरठ। मेरठ के डूंगर चर्मशोधन प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट मेरठ को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, 21 मई 2026 को दलितों पर बढ़ते अत्याचारों के विरोध में शोषित क्रांति दल के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत के नेतृत्व में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत पत्र सौंपा था। शिकायत में मेरठ के गांव डूंगर स्थित चर्मशोधन इकाइयों को बिना पूर्व सूचना के सील किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने बताया कि गांव डूंगर में दलित समाज के लोग वर्षों से चर्मशोधन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और यह उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। उन्होंने कहा कि इन चर्मशोधन इकाइयों का निर्माण जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराया गया था तथा उनका अनुबंध वर्ष 2034 तक वैध है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 13 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के चर्मशोधन इकाइयों को सील कर दिया। इससे चर्मशोधकों को अपना कच्चा माल हटाने अथवा उसका उपयोग करने का अवसर नहीं मिला, जिसके चलते लाखों रुपये मूल्य का माल खराब होकर नष्ट हो गया।
शोषित क्रांति दल का दावा है कि प्रशासनिक कार्रवाई से लगभग 150 दलित परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। प्रभावित परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और कई परिवारों के सामने रोज़गार एवं भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
शिकायत में आयोग से मांग की गई थी कि मेरठ प्रशासन को निर्देशित कर चर्मशोधन इकाइयों से सील हटवाई जाए तथा प्रभावित परिवारों को पुनः अपना व्यवसाय संचालित करने और आजीविका अर्जित करने की अनुमति दी जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट मेरठ से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग की इस कार्रवाई के बाद मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।
Related Category
Crime