मायावती का विपक्ष और कुछ दलित संगठनों पर निशाना, बोलीं— BSP सत्ता की 'मास्टर चाबी' से सामाजिक परिवर्तन में विश्वास करती है
मायावती ने शनिवार को जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि बहुजन समाज पार्टी अन्य राजनीतिक दलों की तरह चुनावी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी एवं निजी संपत्तियों में तोड़फोड़, हिंसक घटनाओं, हवाहवाई वादों तथा मिथ्या प्रचार-प्रसार के माध्यम से
Mayank Verma

Media via 8NewsNetwork
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को कहा कि बहुजन समाज पार्टी अन्य राजनीतिक दलों की तरह चुनावी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी एवं निजी संपत्तियों में तोड़फोड़, हिंसक घटनाओं, हवाहवाई वादों तथा मिथ्या प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा कि बसपा ऐसी राजनीतिक चालबाजियों से पूरी तरह दूर रहकर "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" के सिद्धांत पर कार्य करने वाली देश की एकमात्र अंबेडकरवादी पार्टी है।
मायावती ने कहा कि बसपा गरीबों, मजदूरों, शोषितों, पीड़ितों, उपेक्षितों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ सवर्ण समाज के गरीब लोगों के हित एवं कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के नेतृत्व में बनी चार सरकारों ने जनहित, जनकल्याण, विकास, अपराध नियंत्रण तथा कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में "कानून द्वारा कानून का बेहतरीन राज" स्थापित किया, जो एक आदर्श संवैधानिक सरकार का उदाहरण है।
बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि उनकी पार्टी विरोधी दलों और उनके इशारे पर काम करने वाले कुछ दलित संगठनों व पार्टियों की तरह छल, छलावा और मगरमच्छ के आंसू बहाने की राजनीति नहीं करती। उन्होंने कहा कि बसपा महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायण गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के बताए मार्ग पर चलते हुए सत्ता की "मास्टर चाबी" के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है।
मायावती ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बसपा का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे विरोधी दलों में बेचैनी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष "साम, दाम, दंड और भेद" की नीति अपनाकर कुछ दलित संगठनों और पार्टियों को आगे कर दलित एवं बहुजन समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना था कि बहुजन समाज को ऐसे प्रयासों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शोषित, पीड़ित और उपेक्षित वर्ग अच्छी तरह जानते हैं कि मायावती के नेतृत्व वाली सरकारों ने ही उनकी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का बेहतर समाधान किया था। उन्होंने कहा कि बसपा नहीं चाहती कि गरीब, मजदूर, बेरोजगार नौजवान या अन्य उपेक्षित वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के दौरान सरकारी उत्पीड़न, मुकदमों और जेल जैसी परिस्थितियों में फंस जाएं, क्योंकि इससे उनका भविष्य और परिवार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उनके अनुसार, यही विरोधियों की वास्तविक रणनीति है ताकि बसपा का अंबेडकरवादी मिशन प्रभावित हो।
अपने बयान में मायावती ने सहारनपुर की घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि बसपा ने दलित उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि जब संसद में भी उनकी बात नहीं सुनी गई तो डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने की परंपरा का अनुसरण करते हुए बसपा नेतृत्व ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया था।
मायावती ने कहा कि बसपा नेतृत्व के संघर्ष के ऐसे अनेक उदाहरण हैं और जो लोग बसपा को भी अन्य दलों की तरह "मगरमच्छ के आंसू" बहाने की सलाह देते हैं, वे विरोधी दलों के जातिवादी और विषैले षड्यंत्र का शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मान्यवर कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना सदियों से शोषित और वंचित समाज को भाईचारे के आधार पर संगठित कर "हुक्मरान जमात" बनाने के उद्देश्य से की थी, ताकि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्मसम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन को मंजिल तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान लगातार जारी है और बसपा के मिशन-2027 में बाधा डालना बाबा साहेब के आंदोलन के हितों के विरुद्ध होगा।
अपने बयान के अंत में मायावती ने "जय भीम, जय भारत" का संदेश देते हुए बहुजन समाज से एकजुट और सतर्क रहने की अपील की।