मेरठ: CCSU में प्रोफेसर नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल, सपा नेता शशिकांत गौतम ने राज्यपाल से की शिकायत
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ में
Mayank Verma

Media via 8NewsNetwork
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ में प्रोफेसर (आचार्य) एवं एसोसिएट प्रोफेसर (सह-आचार्य) पदों पर होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सपा लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष शशिकांत गौतम ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति को लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने उक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था, लेकिन साक्षात्कार का कार्यक्रम विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से जारी किए जाने की जानकारी नहीं है। इसके बावजूद आगामी दिनों में साक्षात्कार आयोजित किए जाने और 25 अगस्त 2026 को कार्य परिषद की बैठक में नियुक्तियों के अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अभ्यर्थियों को सार्वजनिक सूचना दिए बिना व्यक्तिगत ई-मेल के माध्यम से साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। ऐसे में यह जांच का विषय बताया गया है कि किन-किन अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, उन्हें किस माध्यम से सूचना दी गई तथा चयनित या शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों की पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया का परीक्षण किस आधार पर किया गया।
शशिकांत गौतम ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि विश्वसनीय सूत्रों से आरएसएस पदाधिकारी की पत्नी मनोरमा राय के समाजशास्त्र विभाग में चयन की संभावना पहले से तय होने की चर्चा सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाई जानी चाहिए।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि यदि विश्वविद्यालय के स्वपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों को पात्रता के आधार पर योग्य नहीं माना गया है, तो निजी महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षिका की पात्रता किन नियमों और मानकों के आधार पर स्वीकार की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है अथवा जांच में चयन प्रक्रिया में अनियमितता, मनोरमा राय की नियुक्ति या पक्षपात सामने आता है, तो वह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।