मेरठ: IPS अधिकारी अविनाश पांडेय को बर्खास्त करने की मांग, मिशन आंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने अमित शाह को भेजा पत्र
सूरज कुमार बौद्ध ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर मेरठ में तैनात आईपीएस अधिकारी एवं एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने तथा उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पत्र में मेरठ में 8 जुलाई 2026 को दलित छात्रा
Mayank Verma

Media via 8NewsNetwork
नई दिल्ली/मेरठ: मिशन आंबेडकर के संस्थापक सूरज कुमार बौद्ध ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर मेरठ में तैनात आईपीएस अधिकारी एवं एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने तथा उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पत्र में मेरठ में 8 जुलाई 2026 को दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में कहा गया है कि एक ओर भारत सरकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान से देश चलाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मेरठ में तैनात एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुसूचित जाति समुदाय के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सूरज कुमार बौद्ध ने इसे संविधान, लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के विरुद्ध बताते हुए गृह मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को ललिता गौतम की हत्या के बाद पीड़ित परिवार एवं अनुसूचित जाति समुदाय के लोग शांतिपूर्ण ढंग से मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचकर न्याय की मांग कर रहे थे। इसी दौरान एसएसपी अविनाश पांडेय ने कथित रूप से प्रदर्शन कर रहे दलित युवाओं को धमकाया और उनके साथ अभद्र एवं अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।
सूरज कुमार बौद्ध ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि अविनाश पांडेय जाति से ब्राह्मण होने के कारण दलितों के प्रति जातिवादी मानसिकता रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी ने पुलिस नियमावली, सरकारी निर्देशों, न्यायपालिका के आदेशों तथा अपने प्रशासनिक प्रशिक्षण की भी परवाह नहीं की और सार्वजनिक रूप से लाउडस्पीकर से अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के लिए कथित तौर पर अपमानजनक एवं अभद्र टिप्पणियां कीं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद अधिकारी ने भीड़ में जाकर युवाओं के साथ मारपीट की।
पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि हिरासत में लिए गए एक युवक रवि गौतम के साथ पुलिस वाहन के भीतर मारपीट की गई, उसे थप्पड़ मारे गए तथा उसके साथ गाली-गलौज की गई। सूरज कुमार बौद्ध ने इसे एक मृतक पीड़िता के लिए न्याय मांग रहे शांतिपूर्ण लोगों पर एकतरफा कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह घटना पुलिस अधिकारी की कथित जातिवादी मानसिकता और सत्ता के दुरुपयोग को दर्शाती है।
पत्र में सवाल उठाया गया है कि यदि अनुसूचित जाति समुदाय के लोग भी इसी प्रकार पुलिस अधिकारियों को गालियां देने लगें तो देश की कानून व्यवस्था का क्या होगा। उन्होंने लिखा कि संविधान प्रशासन से पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाने की अपेक्षा करता है, लेकिन यदि रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो शोषित एवं वंचित समाज न्याय की उम्मीद किससे करेगा। पत्र में यह भी कहा गया है कि क्या दलित होना और अपनी बेटी की हत्या पर न्याय मांगना इतना बड़ा अपराध है कि लोगों को सार्वजनिक रूप से अपमानित और पीटा जाए।
सूरज ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यह केवल कुछ युवाओं पर हमला नहीं बल्कि भारतीय संविधान, मानवाधिकारों और पूरे बहुजन समाज के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के गंभीर आरोपों वाले अधिकारी को ऐसे महत्वपूर्ण पद पर बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। चूंकि आईपीएस अधिकारी अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अंतर्गत आते हैं, इसलिए गृह मंत्री को उनका सर्वोच्च नियंत्रक (Controlling Authority) बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र में गृह मंत्री अमित शाह से दो प्रमुख मांगें की गई हैं—
1. मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय (IPS) को कथित अमानवीय, हिंसक, गैर-कानूनी एवं असंवैधानिक कृत्यों के लिए तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त (Dismiss) किया जाए।
2. अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को धमकाने, हिरासत में लिए गए युवकों के साथ कथित मारपीट करने तथा सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज और अपमानित करने के आरोपों में उनके विरुद्ध सख्त कानूनी मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
पत्र के अंत में सूरज कुमार बौद्ध ने कहा कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं होती है तो इससे प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल गलत दिशा में बढ़ेगा और भविष्य में दलित समुदाय के साथ हिंसक, अमानवीय एवं कथित आपराधिक कृत्यों की पुनरावृत्ति की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति देश को लोकतांत्रिक व्यवस्था से हटाकर "पुलिस स्टेट" जैसी स्थिति की ओर ले जा सकती है।