अमेरिका-ईरान वार्ता में बाधा का दावा: इसहाक डार बोले—लेबनान संघर्ष से कूटनीतिक कोशिशें प्रभावितपाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें लगभग विफल हो गई थीं, क्योंकि इस दौरान लेबनान पर इजराइली हमले ने हालात को जटिल बना दिया। स्विट्ज़रलैंड के एक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता का उल्लेख करते हुए इसहाक डार ने कहा कि यदि क्षेत्रीय तनाव न बढ़ता तो बातचीत कुछ दिन पहले ही शुरू हो सकती थी, लेकिन लेबनान पर हमले के बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई। Ishaq Dar ने अल अरेबिया न्यूज़ चैनल से बातचीत में बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे होने वाली वार्ता में तीन मुख्य कार्य समूह शामिल होंगे—ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और जब्त फंड, तथा लेबनान से जुड़े मुद्दे। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में शामिल पक्षों को कुछ मुद्दों पर काम पूरा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है, जबकि एक व्यापक समझौते की उम्मीद 60 दिनों के भीतर की जा रही है। गौरतलब है कि स्विट्ज़रलैंड में हुई इस बातचीत में पाकिस्तान और क़तर मध्यस्थ की भूमिका में शामिल थे। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की
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पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशें लगभग विफल हो गई थीं, क्योंकि इस दौरान लेबनान पर इजराइली हमले ने हालात को जटिल बना दिया।
स्विट्ज़रलैंड के एक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता का उल्लेख करते हुए इसहाक डार ने कहा कि यदि क्षेत्रीय तनाव न बढ़ता तो बातचीत कुछ दिन पहले ही शुरू हो सकती थी, लेकिन लेबनान पर हमले के बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई।
Ishaq Dar ने अल अरेबिया न्यूज़ चैनल से बातचीत में बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे होने वाली वार्ता में तीन मुख्य कार्य समूह शामिल होंगे—ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और जब्त फंड, तथा लेबनान से जुड़े मुद्दे।
उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत में शामिल पक्षों को कुछ मुद्दों पर काम पूरा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है, जबकि एक व्यापक समझौते की उम्मीद 60 दिनों के भीतर की जा रही है।
गौरतलब है कि स्विट्ज़रलैंड में हुई इस बातचीत में पाकिस्तान और क़तर मध्यस्थ की भूमिका में शामिल थे। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।