मायावती का आरक्षण को लेकर RSS पर हमला, बोलीं- ‘क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित’
लखनऊ: बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख के हालिया बयान को
Mayank Verma

Media via 8NewsNetwork
लखनऊ: बसपा सुप्रीमो मायावती ने आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख के हालिया बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज, खासकर एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए आरक्षण सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के साथ-साथ आत्म-सम्मान की जिंदगी से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामला है।
जाति के आधार पर सदियों से शोषित और वंचित रहे एससी-एसटी समाज के लिए आरक्षण को जरूरी बताते हुए मायावती ने कहा कि जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय और अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं, ऐसे में क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है।
आरएसएस प्रमुख के उस बयान पर आपत्ति जताते हुए, जिसमें आरक्षण के राजनीतिकरण और लाभार्थियों द्वारा स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ने की बात कही गई थी, मायावती ने इसे जातिवादी सोच बताया। उनके अनुसार इससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति हो सकती है, लेकिन संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है।
मायावती ने कहा कि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित, पीड़ित, उपेक्षित और तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधार पर समता और समानता का संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार देने का माध्यम है। इसे केवल आर्थिक उन्नति के आधार पर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में आज भी मौजूद है।
उन्होंने केंद्र सरकार से एससी-एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने के पक्ष में प्रभावी और समुचित कानूनी पैरवी करने की बात कही। साथ ही सरकारों के लचर रवैये और अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव को सामाजिक परिवर्तन जैसे मामलों में न्याय मिलने में बाधा बताया।
आरएसएस से अपील करते हुए मायावती ने कहा कि वह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा सम्मान देते हुए आरक्षण को लेकर राजनीति करना बंद करे और आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत से बचे। देश में ‘समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social Order) की स्थापना के संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति में सहयोग करना ही वक्त की जरूरत और समय की मांग है।